what is primary memory, secondary memory, cache memory ( primary, secondary aur cache memory kya hoti hai)



नमस्कार दोस्तों टेक्निकल दादी में आप सभी का बहुत बहुत स्वागत है और आज हम बात करने वाले है अलग अलग टाइप की मेमोरी के बारे में, जी हा कंप्यूटर में अलग अलग टाइप की मेमोरीज होती है कितने प्रकार की मेमोरी होती है कौन कौन सी मेमोरी होती है उनकी जो आवश्यकता है उनका जो कंप्यूटर में रोल है उसको आज हम यहाँ डिटेल में बताने वाले है तो आज आपको सब कुछ अच्छे से समझ में आ जायेगा कि इंटरनल मेमोरी क्या होती है एक्सटर्नल मेमोरी क्या होती है प्राइमरी मेमोरी क्या है सेकेंडरी मेमोरी क्या है रैम क्या है कैश क्या है तो ये जो वर्ड्स है सारी की सारी जो terminologies है जो आपने कहीं न कहीं सुनी होगी वह सब कुछ आज आपको यहाँ अच्छे से समझ में आ जाएगी तो बने रहिये मेरे साथ और मजे मजे में इसे पढिये |
 
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तो कंप्यूटर के अन्दर बहुत सारी मेमोरीज होती है अब होता क्या है एक नार्मल consumer होता है उसको इतना ज्यादा आईडिया नहीं होता है और वह कहा पर फँस जाता है तो इस पोस्ट को मैंने क्यूँ बनाया है तो उदहारण के लिए लिए मान लेते है तो एक नार्मल consumer कंप्यूटर बनाना चाहता है या नया लैपटॉप खरीदना चाहता है तो उसका जो मेनू होता है या वो वहां स्टडी कर रहा होता है तो कुछ कंपनी होती है जिन्होंने वहां पर क्लियर मेंशन किया होता है लिस्ट में कि इसमें 4 गीगा बाइट रैम है तो इससे क्लियर हो जाता है कि ये रैंडम एक्सेस मेमोरी है लेकिन कुछ कंपनी होती है जो इतना डेटल में नहीं लिखती है तो आपको बहुत सी लिस्ट में यही लिखा मिलेगा की 4 गीगाबाइट मेमोरी और फिर यहाँ consumer फस जाता है और उसे फिर समझ नहीं आता कि ये कौन सी मेमोरी है तो आज इससे आप अच्छी तरह ये समझ लोगे की ये सारी की सारी जो मेमोरीज है वह क्या है और कभी भी कंफ्यूज नहीं होगे, लिस्ट में देखते ही समझ लोगे कि यह इस मेमोरी की बात कर रहे है | तो सबसे पहले हम यह जान लेते है कि मेमोरी क्या होता है तो इसके लिए आप एक उदहारण से समझ लेंगे जैसे हम लोगो की एक ह्यूमन मेमोरी होती है और हमारी मेमोरी में बहुत सी ऐसी चीज़े होती है जिन्हें हुम लोगो को याद रखनी पड़ती है और भविष्य में जब हम लोगो उसकी जरूरत पड़ती है तो हम लोग उसे रिकॉल करके उसका यूज करते है तो ऐसे ही कंप्यूटर में जो डाटा फ्लो हो रहा होता है या स्टोर हो रहा होता है या processing हो रहा होता है तो उसे कहीं न कहीं स्टोर तो करना पड़ेगा फिर चाहे वह स्थायी रूप से या अस्थायी रूप से करना पड़े तो जहा पर हम इसे स्टोर करते है उस डिवाइस को हम मेमोरी डिवाइस बोलते है और ये जो मेमोरी डिवाइस होते है इनके बगैर कंप्यूटर अधूरा है तो ऐसे ही बहुत सारे अलग अलग टाइप की मेमोरी होती है जिनकी हम एक एक करके बात करते है तो सबसे पहला डिवाइस जो है वो –

प्राइमरी मेमोरीइसे आपने जरूर सुना होगा और इसे मेन मेमोरी भी बोलते है यानी कि रैम और इसके बारे में मैंने पहले से एक पोस्ट बना रखी है जिसे आप यहाँ क्लिक करके देख सकते है लेकिन फिर भी मैं यहाँ बता देता हूँ कि इसकी फुल फॉर्म रैंडम एक्सेस मेमोरी होती है तो जहा कहीं भी प्राइमरी मेमोरी की बात होती है या सिस्टम मेमोरी की बात होती है तो इसका मतलब यही होता है कि रैम की बात चल रही है तो जो रैम है वो किसके लिए बनी है प्रोसेसर के लिए , यानी कि आपके प्रोसेसर को जितना भी डाटा मिलता है वो रैम से मिलता है अर्थात जब आप सिस्टम को कोई इंस्ट्रक्शन देते है तो वो सारा इंस्ट्रक्शन पहले रैम में जाकर स्टोर होगा और फिर प्रोसेसर उस रैम से डाटा को उठाकर आपको उसका रिजल्ट देगा यानी कि इस रैम को हम वोलेटाइल मेमोरी भी बोल सकते है अब वोलेटाइल क्या होता है तो मैं आपको बता दूं कि आपका रैम में डाटा तब तक स्टोर है जब तक आपका कंप्यूटर ऑन है और जैसे ही आप अपना कंप्यूटर ऑफ करते है आपकी रैम से वो सारा का सारा डाटा डिलीट हो जायेगा यानी कि इसे टेम्पररी मेमोरी भी बोल सकते है, और सबसे बड़ी बात इसकी यह है कि इस रैम पर आपका कोई एक्सेस नहीं है यानी कि आप इस पर कोई भी डाटा स्टोर नहीं कर सकते, तो अगर आपके सामने कभी भी लिस्ट में या कंप्यूटर बनाते समय या लैपटॉप खरीदते समय वह आपको 2 गीगा हर्ट्ज़, 4 गीगा हर्ट्ज़, 8 गीगा हर्ट्ज़  में कुछ लिखा मिलता है तो आप वहां समझ जाइये की यहाँ रैम की बात यानी कि प्राइमरी मेमोरी की बात हो रही है | लेकिन अब बात यूजर के मन में यह आती है जब इसमें डाटा स्टोर नहीं हो सकता है तो फिर हम किस्मे करें यानी कि कोई ऐसी भी डिवाइस हो जिस पर हमारा एक्सेस हो तो उसके लिए कंपनी ने एक दूसरी डिवाइस बनाई जिसे बोला जाता है –

सेकेंडरी मेमोरी तो इस सेकेंडरी डिवाइस को हम हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, sd कार्ड इत्यादि  बोलते है और इसे परमानेंट मेमोरी डिवाइस बोला जाता है इसमें हम अपना डाटा परमानेंट स्टोर कर सकते है अर्थात जो भी हम अपना कंप्यूटर सिस्टम में काम करते है या फिर फिर कुछ डाक्यूमेंट्स, सोंग्स, विडियो या फिर कुछ भी हम इसमें परमानेंट स्टोरेज के रूप में सेव कर सकते है ये रैम की तरह नहीं होती है ये बहुत ही लार्ज अमाउंट में जैसे कि gb, tb,pb इत्यादि के रूप में होती है | सेकेंडरी डिवाइस को भी दो रूपों में बांटा गया है जिसे इंटरनल मेमोरी और एक्सटर्नल मेमोरी कहा जाता है| अब ये भी एक बहुत बड़ा तथ्य है लोगो का कि जो डिवाइस कैबिनेट के अन्दर लगा होता है उसे इंटरनल बोलते है और जो बाहर से हम लोग जैसे कि पेन ड्राइव बगैरा यूज करते है उसे एक्सटर्नल बोलते है लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है | इंटरनल मेमोरी जो डिवाइस होते है उसका मतलब ये होता है कि ये कंप्यूटर सिस्टम का एक पार्ट है यानी कि वो एक इंटरनल पार्ट है अर्थात जो आपके कंप्यूटर सिस्टम में जो विंडोज लोड है अगर आप उसकी हार्ड डिस्क को बाहर निकल ले तो आपका वो कंप्यूटर सिस्टम बेकार हो जायेगा यानी कि कंप्यूटर सिस्टम वो सिस्टम तभी रहेगा जब उसकी हाई रिक्वायर्ड इंटरनल मेमोरी उसमे फिक्स होगी तो इंटरनल मेमोरी का यह मतलब होता है तो इंटरनल मेमोरी अब मार्किट में कई तरीके की है जिसमे सबसे पहली hdd, फिर ssd, फिर sshd आई है इन सबके बारे में भी मैं आगे पोस्ट लिखने वाला हूँ कि ssd, sshd, hdd में क्या अंतर है तो ये जो डिवाइस है सारे कंप्यूटर के इंटरनल पार्ट है इन पर आप ऑपरेटिंग सिस्टम इंस्टाल कर सकते है और जो एक्सटर्नल डिवाइस होते है उन पर आप ऑपरेटिंग सिस्टम इनस्टॉल नहीं कर सकते हो, एक्सटर्नल डिवाइस लगे है या नहीं लगे है उस कंप्यूटर में तो इससे कंप्यूटर या लैपटॉप को कोई फर्क नहीं पड़ता है| अब बात करते है तीसरी मेमोरी की जिसे बोलते है-

कैश मेमोरी तो ये जो मेमोरी होती है वह भी एक प्रकार की वोलेटाइल मेमोरी होती है रैम की तरह ही, लेकिन ये जो मेमोरी है वो extremly बहुत फ़ास्ट होती है और यह बहुत कम अमाउंट में होती है यानी कि इसका साइज़ बहुत ही कम होता है वैसे इसके बारे में मैंने पहले से ही पोस्ट बनाई हुई है अगर आपने नहीं पढ़ी है तो यहाँ क्लिक करके इसे पढ़ सकते है, फिर भी हम शार्ट में बात कर लेते है ये बहुत ही फ़ास्ट मेमोरी होती है और जहा कहीं भी आपको kb या mb में ये मेमोरी लिखी मिल जाए तो आपको समझ लेना चाहिए कि यहाँ कैश मेमोरी की बात चल रही है ये भी लोगो का एक बहुत संदेह है कि कैश मेमोरी सिर्फ प्रोसेसर के लिए होती है लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है कैश मेमोरी का अपना अलग अलग रोल होता है जैसे कभी आपने hdd, ssd, या sshd खरीदी होगी तो वहां पर भी कैश मेमोरी के बारे में लिखा होता है तो इसमें भी जो सारा डाटा फ्लो होता है वो कैश मेमोरी के जरिये ही होकर जाता है और बहुत सारी जगह पर कैश मेमोरी का काम किया जाता है तो कैश मेमोरी का जो रोल है वो भी रैम की ही तरह होता है लेकिन ये रैम से भी बहुत ज्यादा फ़ास्ट होता है और रैम में जितना भी डाटा प्रोसेसर के पास जाता है वो इस कैश मेमोरी से होकर ही जाता है तो प्रोसेसर में आप जब भी L1, L2, L3 कहीं लिखा देखे तो आप समझ लेना की ये कैश मेमोरी की बात हो रही है और जो सर्वर लेवल पर मेमोरी का यूज होता है वह L4 का भी यूज होता है और यह चार लेवल पर मेमोरी होती है |


तो दोस्तों अब उम्मीद करता हूँ कि आपको इन सबके बारे में जानकार सब कुछ अच्छी तरह से समझ आ गया होगा लेकिन फिर भी कुछ भी अब भी आपको समझ में ना आया हो तो मुझसे कमेंट में जाकर पूछ सकते है मैं आपको और समझाने की पूरी कोशिश करूंगा | दोस्तों मिलते है फिर एक नयी पोस्ट के साथ तब तक लिए जय हिन्द जय भारत |             
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