what is core i3, core i5, core i7, generation [core i3,core i5, core i7 aur generation kya hoti hai ]



दोस्तों आज हम लोग जानेंगे कि core i3, core i5, core i7 क्या होता है और इसके अन्दर क्या diffrences है क्यूँ कि जब भी आप लोग लैपटॉप या कंप्यूटर मार्किट में लेने जाते है तो सबसे पहले आपके सामने core i3, core i5, core i7 आता है तो हम core i3 ले तो क्यूँ ले, नहीं ले तो क्यूँ न ले core i7, core i5 क्यूँ नहीं ले और ले तो क्यूँ न ले और क्या वर्क करेगा और क्यूँ हमे इनको सेलेक्ट करना चाहिए इन सारी बातो पर आज हम लोग प्रकाश डालने वाले है और साथ ही साथ जब हम लोग इसे खरीदते है तो इसके साथ जनरेशन भी चलता है यानी कि जैसे ही उसका कॉन्फ़िगरेशन बताया जाता है तो इसे यह कहकर बताया जाता है कि ये लैपटॉप या कंप्यूटर में i3, i5 या i7 का प्रोसेसर है और ये थर्ड या फोर्थ या सिक्स या सेवेंथ जनरेशन का है तो यह जनरेशन क्या होता है वह भी हम इस पोस्ट में सीखेंगे, नमस्कार दोस्तों मेरा नाम अजीत तिवारी है और टेक्निकल दादी में आप सभी का स्वागत है, चलिए फिर सीख लेते है –
what is core i3, core i5, core i7, generation [core i3,core i5, core i7 aur generation kya hoti hai ]
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तो सबसे पहले हम लोग बात करेंगे कि जनरेशन क्या होता है तो वास्तव में होता क्या है कि जो cpu होता है उसके अन्दर जो सबसे ज्यादा यूज होने वाला कॉम्पोनेन्ट होता है वो ट्रांजिस्टर होता है और cpu लाखो करोड़ो ट्रांजिस्टर से मिलकर बना होता है अगर आपने cpu के बारे में मेरी पिछली पोस्ट को नहीं पढ़ा है तो यहाँ क्लिक करके उसे पढ़ सकते है तो जनरेशन क्या होता है जो शुरुआत में ट्रांजिस्टर होते थे वो बड़े साइज़ के होते थे और जैसे जैसे ये ट्रांजिस्टर छोटे होते गये वैसे वैसे जनरेशन बदलती गयी यानी कि जैसे जैसे cpu के ट्रांजिस्टर छोटे होते गये वैसे वैसे cpu और उतना ही बढ़िया होता गया और विद्युत् की खपत उतनी ही कम होती गयी यानी कि बैटरी बैकअप बड़ेगा तो जनरेशन बहुत महत्व रखता है तो वास्तव में होता क्या जो हमारी इंटेल कंपनी है वह हर साल या फिर दो साल में जनरेशन change करता है इसका मतलब यह कि कंपनी ने और छोटा ट्रांजिस्टर का अविष्कार कर दिया है और जैसे ही वह उसे मार्किट में उतारती है वैसे ही जनरेशन change हो जाती है और cpu की एक हायर जनरेशन स्टार्ट हो जाती है अब जैसे कि पहले के जो कंप्यूटर या लैपटॉप होते थे उसमे cpu में 28 नैनो मीटर या 20 नैनो मीटर का cpu यूज होता था लेकिन आज कि डेट में 14 नैनो मीटर का cpu यूज हो रहा है यानी कि उसे अपनी आँखों से भी नहीं देख सकते इतने छोटे ट्रांजिस्टर का अविष्कार हो चूका है तो जैसे ही ये जनरेशन बड़ता है जनरेशन बड़ने का मतलब ये कंपनी ने ट्रांजिस्टर को और छोटा करके cpu को बना लिया तो जितने भी आपको हाई जनरेशन के लैपटॉप या कंप्यूटर मिलेंगे उतना ही बैटरी बैकअप अच्छा मिलेगा और उतना ही बिजली की खपत कम होगी | अब आइये हम लोग देखते है कि कैसे cpu को पहचाने कि हमारे लैपटॉप में या कंप्यूटर में थर्ड या फोर्थ या फिफ्थ या सिक्स या सेवेन जनरेशन का cpu लगा है तो इसके लिए मैं आपको नीचे दिए गये एक चित्र के अनुसार समझाऊंगा |
 
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तो इस चित्र में जो सबसे पहले लिखा इंटेल कोर और फिर उसके बाद लिखा है i7, अगर i3 लिखा होगा तो i3 प्रोसेसर होगा अगर i5 तो i5 प्रोसेसर होगा उसके बाद देखिये कुछ नंबर्स लिखे होते है जैसे 3770 या निचे देखिये 3920 लिखा है तो इसमें जो सबसे पहला वाला नंबर है जैसे इसमें 3 लिखा है तो ये थर्ड जनरेशन का होगा अगर 4 लिखा होगा तो ये फोर्थ जनरेशन का होगा इसी तरह आगे अगली जनरेशन के प्रोसेसर होंगे उसके बाद के जो नंबर होते है वो अपडेट नंबर्स होते है और उसके बाद एक सिंबल होगा जैसे k भी हो सकता है h भी हो सकता है t भी हो सकता है ये नंबर इसके टेक्निकल स्पेसिफिकेशन के बारे में समझाते है, तो यहाँ से आप जनरेशन के बारे में पता लगा सकते है तो आगे हम अब बात करते है कि core i3 क्या है तो कोर i3 वास्तव में एक ड्यूल कोर है इसके अन्दर दो कोर मिलकर के एक वर्क करता है और इसके अन्दर हाइपर थ्रेडिंग है अब हाइपर थ्रेडिंग क्या होता है तो इसका मतलब यह होता है कि जब भी आप अपने कंप्यूटर या लैपटॉप सिस्टम में ऑपरेटिंग सिस्टम इंस्टाल करते है और हाइपर थ्रेडिंग को इनेबल करते है तो जो आपका ड्यूल कोर प्रोसेसर है तो आपका ऑपरेटिंग सिस्टम उस दो कोर को चार कोर समझेगा यानी कि आपका सिस्टम क्वैड कोर सिस्टम बन जाता है जिससे आपका सिस्टम काफी बेहतर तरीके से काम करता है | तो आपको इस कंप्यूटर सिस्टम खरीदते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि ड्यूल कोर खरीदते समय उसमे हाइपर थ्रेडिंग इनेबल होना चाहिए |

अब बात करते है i5 की तो इसमें मैं आपको बता दूं कि लैपटॉप में अलग कॉन्फ़िगरेशन होता है और डेस्कटॉप में अलग होता है तो लैपटॉप में आपको ड्यूल कोर ही मिलता है लेकिन हाइपर थ्रेडिंग इनेबल मिलती है जिसकी वजह से वह क्वैड कोर ही कहलाएगी और डेस्कटॉप में आपको सीधे आपको क्वैड कोर ही मिलता है इसमें हाइपर थ्रेडिंग का कोई चक्कर नहीं होता है तो अगर आपको बहुत सिंपल वर्क करना है तो मैं आपको सलाह दूंगा कि आप कोर i3 का ही यूज करे लेकिन अगर आप इन सबके अलावा थोडा एडिटिंग का भी काम करते है और थोडा सा हाई क्वालिटी का गेमिंग भी यूज करते है या फिर हाई ब्राउज़िंग करते है या फिर फोटोशोप, कोरेल ड्रा का यूज करते है तो आपको कोर i5 ही खरीदना बेहतर होगा | अब आगे हम बात करते है कोर i7 की तो इसके लिए भी लैपटॉप में अलग कॉन्फ़िगरेशन मिलेगा, लैपटॉप में आपको ड्यूल कोर या क्वैड कोर मिलता है और इसमें हाइपर थ्रेडिंग इनेबल मिलता है यानी की इसके कोर डबल हो जाते है और इसी तरह आपको डेस्कटॉप में क्वैड कोर या ओक्टा कोर तो मिलता ही है और इसमें भी हाइपर थ्रेडिंग इनेबल मिलता है तो जब इसमें आपको बहुत हाई क्वालिटी में वर्क करना हो जैसे विडियो मिक्सिंग वगैरा तो मैं आपको यही सलाह करूँगा कि आपको कोर i7 ही लेना चाहिए और ख़ास तौर से डेस्कटॉप की परफॉरमेंस लैपटॉप से ज्यादा मिलेगी अगर ख़ासकर से आपने cpu ओक्टा कोर का लगाया है तब क्यूँ कि दोनों के अन्दर ही हाइपर थ्रेडिंग इनेबल है और डेस्कटॉप में ओक्टा कोर ठीक डबल तरह से काम करेगा जिससे उसकी परफॉरमेंस भी सुपर होगी | 

तो दोस्तों मैं उम्मीद करता हु कि आपको कोर i3, कोर i5, कोर i7 के बारे में और जनरेशन के बारे में अच्छी तरह समझ में आ गया होगा अगर आपका कोई भी प्रश्न रह गया हो तो मुझसे कमेंट में जाकर पूछ सकते है मैं आपके प्रश्नों का जबाब देने की पूरी कोशिश करूंगा | तो मिलते है अब नेक्स्ट पोस्ट में तब तक लिए जय हिन्द जय भारत |   

    
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