what is capacitor, working, types,uses (capacitor kya hota hai aur iski working types aur uses jaaniye)



दोस्तों आज हम लोग बात करेंगे कि कैपेसिटर क्या होता है उसकी वर्किंग क्या होती है कितने टाइप का होता है और ये कहा पर लगा होता है उसकी यूनिट क्या होती है और यह कैसे काम करता है और फिर इसके बाद बात करेंगे कि इसकी टेस्टिंग कैसे की जाती है यानी कि कैसे हम कन्फर्म करेंगे की कैपेसिटर faulty है या ठीक है तो चलिए फिर 
स्टार्ट करते है, नमस्कार दोस्तों मेरा नाम अजीत तिवारी है और आप सभी का टेक्निकल दादी में बहुत बहुत स्वागत है|
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कैपासिटर क्या होता है – कैपासिटर को कई नामो से जाना जाता है जैसे कि कंडेंसर , फ़िल्टर इत्यादि | कैपासिटर एक पैसिव एलिमेंट है जोकि एनर्जी को इलेक्ट्रिकल चार्ज के रूप में स्टोर कर लेता है एक छोटी रिचार्जएबल बैटरी के रूप में कैपासिटर मिली सेकंड्स में चार्ज होता है और डिस्चार्ज होता है कैपासिटर को हिंदी में संधारित्र कहते है कैपासिटर की जो इकाई होती है वो farad होती है और इसे f से दर्शाते है कैपासिटर का अविष्कार जर्मन फिजिसिस्ट evald george kleist ने किया था |

कैपासिटर का सिंबल – इसका सिंबल नीचे दिए गये चित्र के अनुसार होता है |

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कैपासिटर की बेसिक बनावट –  कैपासिटर में दो कंडक्टर प्लेट्स होती है जिनके बीच एक इंसुलेटर मटेरियल रख दिया जाता है इस मटेरियल को डाईइलेक्ट्रिक मटेरियल कहते है कैपासिटर के लिए dielectric मटेरियल पेपर, प्लास्टिक, गिलास, रबर कुछ भी हो सकता है दोनों कंडक्टर को मेटल की पतली rods से जोड़ा जाता है |


कैपासिटर का वर्किंग प्रिंसिपल – 
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कैपासिटर कैसे काम करता है तो यदि मेटल की एक प्लेट को बैटरी के पॉजिटिव सिरे से जोड़ दिया जाए तो उस पर प्लस का चार्ज आ जायेगा ऐसे ही मेटल की दूसरी प्लेट को बैटरी के नेगेटिव सिरे से जोड़ दिया जाए तो उस पर नेगेटिव चार्ज आएगा अब जब इन दोनों प्लेट्स को पास पास लाया जाता है तो दोनों पर एक दुसरे अपोजिट चार्ज होने के कारण ये दोनों attract होंगे और इन दोनों के बीच dielectric लगा हुआ है तो इससे दोनों के बीच इलेक्ट्रोस्टैटिक्स फील्ड पैदा हो जाएगी जिससे अगर बैटरी को हटा भी लेंगे तो इन दोनों के बीच पोटेंशियल डिफरेंस रहेगा अब कोई कंडक्टर को इनसे लगाने पर दोनों प्लेट्स में करंट फ्लो होने लगेगा |
कैपासिटर एनर्जी generate नहीं करता है यह स्थिर विधुत यानी कि static इलेक्ट्रिसिटी को को स्टोर करता है जैसे यदि हम अपने बालों से पेन को लगाकर वापस उस पेन को किसी कागज से टच कराएँगे तो वह कागज उस पेन से चिपक जाता है और फिर उसे कागज से अलग करने के बाद वापस लगायेंगे तो वह नहीं चिपकेगा यानी कि पेन डिस्चार्ज हो गयी है ठीक इसी प्रकार हम किसी बैटरी या अन्य पॉवर source से कैपासिटर के दोनों टर्मिनल को जोड़ते है तो कुछ समय के लिए कैपासिटर मिली या माइक्रो सेकंड के लिए चार्ज हो जाता है और उसे यूज कर लेने से वो दोबारा डिस्चार्ज हो जाता है |


कैपासिटर के प्रकार – कैपासिटर की अगर हम लोग बात करें तो basically कैपासिटर दो प्रकार के होते है |
(1)     polarized capacitor
(2)     non polaraized capacitor
polarized कैपासिटर के प्लस और माइनस टर्मिनल का ध्यान रखना पड़ता है नहीं तो वह काम नहीं करते है लेकिन नॉन polarized कैपासिटर कैसे भी मतलब इनकी पिन्स को कैसे भी सर्किट में लगा सकते है इनसे कोई फर्क नहीं पड़ता है नीचे polarized कैपासिटर और नॉन polarized कैपासिटर के टाइप्स दिए गये है –
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polarized कैपासिटर
(a)    electrolytic कैपासिटर
·         niobium electrolytic capacitor
(1)    solid polymer
(2)    solid Mno2
·         aluminium electrolytic capacitor
(1)    non solid
(2)    solid polymer
(3)    hybrid polymer
·         tantalum electrolytic capacitor
(1)    solid Mno2
(2)    solid polymer
(3)    नॉन polymer

non polarized कैपासिटर
(1)    metal insulated capacitor
(2)    ceramic capacitor
(3)    film capacitor

कैपासिटर का यूज और उसका उपयोग

कैपासिटर को normally हम एक कंडेंसर भी बोलते है या इसे फ़िल्टर भी बोला जाता है और इसे लगभग सभी सर्किट में देखा जा सकता है, इसके कुछ uses नीचे दिए गये है –
(1)    alternating करंट और डायरेक्ट करंट स्टोर करने में कैपासिटर का यूज किया जाता है |
(2)    पॉवर फैक्टर करेक्शन में कैपासिटर का यूज होता है |
(3)    घर के fan और अन्य जगह इसका यूज होता है |
(4)    tuned सर्किट में इसका यूज होता है |
(5)    सेल्फ deffence में गैजेट्स में कैपासिटर का यूज होता है
(6)    low pass फ़िल्टर के लिए यूज किया जाता है |
(7)    noise फ़िल्टर के लिए यूज किया जाता है |
(8)    high pass फ़िल्टर के लिए यूज किया जाता है |

कैपासिटर को चेक करने का मेथड – तो polarized कैपासिटर को चेक करने के लिए मल्टीमीटर को बीप की रेंज में सेट करते है और कैपासिटर के दोनों सिरों पर पर मल्टीमीटर की दोनों पिनो को रखते है अगर मल्टीमीटर की स्क्रीन पर कुछ वैल्यू देते हुए नंबर 1 पर आ जाता है तो कैपासिटर सही माना जायेगा और अगर दोनों साइड से बीप की आवाज आ रही है तो faulty माना जायेगा | 

इसी प्रकार नॉन polarized कैपासिटर पर मल्टीमीटर की दोनों पिनो पर रखने पर अगर कुछ भी वैल्यू शो नहीं हो रही है तो ये सही मन जायेगा अगर बीप की साउंड आ रही है तो ये faulty होगा |
उम्मीद करता हूँ दोस्तों आपको कैपासिटर के बारे में समझ आ गया होगा की ये क्या होता है और इसकी टेस्टिंग कैसे की जाती है अगर आपको ये आर्टिकल पसंद आया हो तो इसे शेयर और लाइक करना न भूलियेगा मिलते है एक अगली पोस्ट में फिर तब तक लिए जय हिन्द जय भारत |

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