what is registor & registance register kya hota hai aur electronics mein iska kya kaam hota hai

दोस्तों आज हम लोग बात करेंगे कि इलेक्ट्रॉनिक्स में रजिस्टर क्या होता है, उसकी वर्किंग क्या होती है और यह सर्किट बोर्ड में कहाँ लगा होता है और इसकी सिंबल या denotting लैटर क्या होता है और इसके ohm’s law के फार्मूला के बारे में बात करेंगे, रियल शेप क्या होती है इसकी यूनिट क्या होती है और यह कितने प्रकार के होते है और अंत में बात करेंगे कि इसकी टेस्टिंग कैसे की जाती है अर्थात कैसे पता करेंगे कि रजिस्टर की वैल्यू कितनी है या उसका मान कितना है और कैसे पता करेंगे कि रजिस्टर faulty है या सही है | नमस्कार दोस्तों मेरा नाम अजीत तिवारी है और टेक्निकल दादी में आप सभी का स्वागत है तो चलिए फिर जान लेते है सबसे पहले –
what is registor & registance register kya hota hai aur electronics mein iska kya kaam hota hai
what is registor & registance register kya hota hai aur electronics mein iska kya kaam hota hai  

रजिस्टर की working के बारे में – रजिस्टर एक ऐसा कंपोनेट होता है जो करंट के रास्ते में रूकावट पैदा करता है मतलब ये करंट को रोकने का काम करता है और ये depend करता है जो रजिस्टर की वैल्यू होती है उसके हिसाब से करंट को कम करके आगे की तरफ पास करता है यानी रजिस्टर की वैल्यू जितनी ज्यादा या जितनी कम होगी है उसी के अनुसार ये करंट को पास करेगा तो जहा पर भी रजिस्टर लगा होता है वह करंट के लिए लगा होता है | अब करंट क्या होता है इसके बारे में मैं अपनी पहली पोस्ट में आपको बता चुका हूँ और अगर आप नहीं जानते तो यहाँ क्लिक करके जान लीजये,  फिर भी शॉर्टकट में बात कर लेते है कि ये इलेक्ट्रॉन्स का प्रवाह होता है |
रजिस्टर का सिंबल -------/\/\/\/\/\------ इस प्रकार का होता है आप जब भी अपने सर्किट बोर्ड को ध्यान से देखेंगे और जहा रजिस्टर लगे होते है वहां पर आपको इसी टाइप का सिंबल नजर आएगा या कभी आपने अपनी नोट बुक में इसी टाइप का सिंबल देखा होगा तो इससे आप पहचान सकते है कि ये रजिस्टर का ही सिंबल है | उसके बाद हम बात करते है उसकी denotting लैटर की, तो किसी सर्किट की अगर हम लोग बात करे चाहे वह मोबाइल हो या लैपटॉप या प्रिंटर या यूपीएस या डेस्कटॉप कंप्यूटर हो या कोई भी इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम हो इन सबके अन्दर जहा पर भी रजिस्टर लगा होता है वहाँ पर उसका कुछ न कुछ लैटर लिखा होता है जैसे कि R, RN, RP, PR इनमे से एक लैटर सर्किट बोर्ड में लिखा पाया जाता है तो यह सब denotting लैटर होते है |
अब बात करते है ohm लॉस फोर्मुले के बारे में तो यह क्या होता है अगर मान लो हमें वोल्टेज निकलना है तो हमें एम्पेयर और रेजिस्टेंस के बारे में पता होना चाहिए, तो इसके लिए एक फार्मूला होता है जोकि ये होता है-

V = I x R यानी कि वोल्टेज = करंट x रेजिस्टेंस

इस फोर्मुले से हम वोल्टेज निकल सकते है अगर हमें एम्पेयर निकलना है वोल्टेज और रजिस्टेंस को डिवाइड कर देंगे तो इससे पता लग जयेगा कि कितना करंट consume हो रहा है और ऐसे ही हम रजिस्टेंस का पता लगा सकते है | एम्पेयर यानी कि जो करंट की यूनिट होती है उसे हम एम्पेयर बोलते है | अब इसकी शेप की बात करे तो इसे आप इस चित्र के द्वारा समझ सकते है पहले के जो रजिस्टर यूज किये जाते थे वो कार्बन टाइप के होते थे और फिर धीरे धीरे जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स डेवेलोप होती गयी तो SMD टाइप के रजिस्टर आये और फिर इसके बाद वेरिएबल टाइप के रजिस्टर आये और कई टाइप के रजिस्टर आये तो इसे आप इसे आप नीचे दिए गये चित्र के द्वारा समझ सकते है |
 
what is registor & registance register kya hota hai aur electronics mein iska kya kaam hota hai
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अब इसके बाद बात करते है कि रजिस्टर की यूनिट क्या होती है तो रजिस्टर को जो वैल्यू होती है वो ohm या मेगा ओम में कैलकुलेट की जाती है और इसकी जो रेंज होती वो 1000 ओम तक होती है और इसके बाद से ये किलो ओम हो जाती है अर्थात 1 किलो ओम = 1000 ओम |

रजिस्टर के प्रकार – अगर हम बात करे तो रजिस्टर दो टाइप के होते है जिसमे पहला lvr (low value register) और दूसरा hvr (high value register) होता है lvr रजिस्टर 50 ओम से कम होता है और hvr 50 ओम से वैल्यू अधिक होती है | और इनके बीच में अंतर ऐसे निकाल सकते है कि अगर मल्टीमीटर के द्वारा lvr रजिस्टर को चेक करे तो इसे continuity पॉइंट पर रखकर अगर दोनों साइड बीप आ रही है तो वो lvr रजिस्टर होते है यानी कि वो 50 ओम से कम होंगे और hvr रजिस्टर को अलग अलग रेंज पर सेट करके जांचा जाता है|

रजिस्टर की टेस्टिंग – अब अगर रजिस्टर को चेक करने की बात आती है तो इसे हम आसानी से एनालॉग या डिजिटल मल्टीमीटर के द्वारा चेक कर सकते है तो इसे चेक करने के लिए सबसे पहले मल्टीमीटर को ओम की रेंज पर सेट करते है और मल्टीमीटर की दोनों पिन्स को रजिस्टर के दोनों सिरों पर रखकर देखते है अगर दोनों साइड से एक सी वैल्यू आ रही है तो इसका मतलब रजिस्टर सही होता है और अगर faulty कंडीशन इसकी तब मानी जाएगी जब दोनों साइड इसकी वैल्यू अलग अलग आ रही हो या कोई भी वैल्यू नहीं आ रही है तो इस कंडीशन में रजिस्टर खराब माना जायेगा|

तो उम्मीद करता हूँ कि आपको रजिस्टर के बारे में सब कुछ सही से समझ आ गया होगा अगर इसके बारे में कोई भी आपको संदेह है तो आप मुझसे कमेंट में पूछ सकते है मैं आपको उसका solution के बारे में बताने की पूरी कोशिश करूंगा, और अगर आपको ये आर्टिकल पसंद आया हो तो इसे शेयर और लाइक करना बिलकुल भी ना भूलियेगा | मिलते है एक नए टॉपिक के साथ तब तक के लिए जय हिन्द वन्दे मातरम |  

    
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