what are difference between electrical & electronics



दोस्तों आज का विषय है, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स में क्या अंतर है |
इलेक्ट्रिकल में भी फ्लो ऑफ़ करंट होता है और इलेक्ट्रॉनिक्स में भी करंट फ्लो होता है तो हम कैसे इन दोनों को अलग अलग कर सकते है ,हम ये भी जानते है कि इलेक्ट्रिकल में ट्रांसफार्मर आता है ,रिले आती है या होम एप्लायंसेज आती है |
जैसे फैन हो गया, बल्ब हो गया या मिक्सर  हो गया ये सब कुछ और हमे पता है इलेक्ट्रॉनिक्स में क्या आता है जैसे VACUME BOLL आती थी ,VACUME TUBE आती थी उसके बाद सेमी कंडक्टर आये ,फिर I.C इंटीग्रेटेड सर्किट आये, मोबाइल , टीवी , कंप्यूटर  और इस तरह से इलेक्ट्रॉनिक्स आगे बढ़ती चली गयी | तो इनको समझने के लिए हम ये समझ सकते है कि इलेक्ट्रिकल उपकरण का मुख्य  उद्देश्य क्या है इलेक्ट्रिसिटी पॉवर को मैक्सिमम एफिशिएंसी के साथ उत्पन्न करना ,उसको डिस्ट्रीब्यूट करना और आजकल तो हम सोलर से भी इलेक्ट्रिसिटी उत्पन्न कर रहे है |

WHAT IS DIFFERENCE ELECTRICALS AND ELECTRONICS
WHAT IS DIFFERENCE ELECTRICALS AND ELECTRONICS
जब कि दूसरी तरफ इलेक्ट्रॉनिक्स में क्या है, इलेक्ट्रॉनिक्स डील करते है इलेक्ट्रॉनिक्स MACHAENICS को जिसमे इलेक्ट्रान की मोशन डिफरेंट मीडिया में होती है | इलेक्ट्रान मोशन हो सकती है-जैसे बल्ब में ,इलेक्ट्रान मोशन हो सकती है सेमी कंडक्टर में ,पर इलेक्ट्रॉनिक्स में इलेक्ट्रान मोशन तो है लेकिन अंडर कण्ट्रोल में ,अगर ये अंडर कण्ट्रोल न हो तो इलेक्ट्रॉनिक्स नहीं बनेगी | इलेक्ट्रॉनिक्स एक साइंस है इलेक्ट्रॉनिक्स FLOW OF ELECTRONS को डील करती है, जैसे हमे पता है ट्रांजिस्टर के केस में जो बेस होता है वो कण्ट्रोल करता है हमे पता है MOSFET में जो गेट है वो फील्ड ऑफ़ इलेक्ट्रान को कण्ट्रोल करता है तो ऐसी कोई न कोई इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस में कण्ट्रोल डिवाइस रहता है जो करंट को कण्ट्रोल करता है और इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस लॉजिकल होती है जिसमे कोई लॉजिक बेस्ड होता है जिस पर वो काम करती है और मैं ये कह सकता हु जो इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस आउटपुट होगी वो इनपुट का फंक्शन होती है यदि कुछ इनपुट है हमारे पास जैसे (i1, i2, i3...) और हम किसी एलेक्ट्रनिक्स डिवाइस को देते है वो इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस हमे आउटपुट देगा (O1,O2,O3 ......). और आउटपुट एक ऐसा फंक्शन रहेगा जिससे इसका इनपुट से कोई न कोई सम्बन्ध रहेगा |अगर हम इनके बीच कोई मैगनेट कंपोनेंट्स तो हम इलेक्ट्रॉनिक्स को मैगनेट इलेक्ट्रॉनिक्स कहेंगे |अगर कोई MACHAENICAL कॉम्पोनेन्ट का यूज करेंगे इनके बीच तो हम उसे ELECTRO MACHAENICAL कहेंगे |यह हमे याद रखना चाहिए की इलेक्ट्रॉनिक्स में जो इनपुट रहेगा वो इलेक्ट्रिकल्स रहेगा | इलेक्ट्रॉनिक्स में दो तरह के सिग्नल यूज होते होते है जिसमे पहला एनालॉग और दूसरा डिजिटल सिग्नल होता है क्यूँ कि जो AND GATE ,NOT GATE ,OR GATE ये सारे सिग्नल डिजिटल सिग्नल पर बेस्ड है ,और अगर हम इलेक्ट्रॉनिक्स में और दीप जाते है तो हम आते है I.C पर ,इसमें तीन तरह की आई.सीस होती है, जिसमे पहली I.C ASIC, दूसरी FPGA और तीसरी MICRO PROCESSOR.
तो माइक्रो प्रोसेसर के उसे होने अब इलेक्ट्रॉनिक्स उसे होती है सॉफ्टवेयर के साथ, सॉफ्टवेयर का काम भी अब इलेक्ट्रॉनिक्स से ही जाना जायेगा,इसीलिये इलेक्ट्रॉनिक्स को एक सॉफ्टवेयर भी कहा जा सकता है तो I.C’S में दो तरह की मेजर टाइप्स होते है एक होते है फिक्स्ड आई सी और दूसरी फ्लेक्सिबल आई सी ,जो फिक्स्ड I.C है उन्हें ASIC कहते है और ये जो I.C होती है इनका जो मैन्युफैक्चर् होता है वो इन्हें कभी change नहीं कर सकता यानी की उसमे इनपुट आउटपुट को change नहीं कर सकता बनाने के बाद |
इसके बाद आती फ्लेक्सिबल I.C ये भी दो तरह की होती है पहली CONFIGURE I.C और दूसरी PROGRAMMABLE I.C. , कॉन्फ़िगर I.C जो होती है वो जैसे CPLDs या FPGAs है और इनको many टाइम्स कॉन्फ़िगर किया जा सकता है |इससे ये समझ में आता है कि इलेक्ट्रॉनिक्स इलेक्ट्रिसिटी को consume करता है| जैसे आपके इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स है तो उनके लिए dc बैटरी चाहिए तो dc बैटरी क्या है एक इलेक्ट्रिक डिवाइस है|
तो आपको समझ आ गया होगा कि जो इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस होते है वो लॉजिक कंट्रोलर होते है अर्थात इलेक्ट्रिकल से पॉवर लेकर generate होते है और जो इलेक्ट्रिकल डिवाइस होते है वो पॉवर स्टेशन से पॉवर उत्पन्न करते है और लाइन्स के द्वारा उसे अलग अलग घरों में डिस्ट्रीब्यूट करते है |
आशा करता हु आपको मेरी ये पोस्ट पसंद आई होगी अगर आपको पोस्ट अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों से शेयर करिए लिखे करिए |मिलते है अगली पोस्ट में ,तब तक लिए धन्यवाद 
जय हिन्द जय भारत |  
Previous
Next Post »